महाभारत आदि पर्व अध्याय 174 श्लोक 18-36

चतु:सप्‍तत्‍यधिकशततम (174) अध्‍याय: आदि पर्व (चैत्ररथ पर्व)

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महाभारत: आदि पर्व: चतु:सप्‍तत्‍यधिकशततम अध्‍याय: श्लोक 18-36 का हिन्दी अनुवाद


विश्वामित्र जी बोले- मैं क्षत्रिय राजा हूँ और आप तपस्‍या तथा स्‍वाध्‍याय साधन करने वाले ब्राह्मण हैं। ब्राह्मण अत्‍यधिक शान्‍त और जितात्‍मा होते हैं। उनमें बल और पराक्रम कहाँ से आ सकता है; फिर क्‍या बात है जो आप मेरी अभीष्ट वस्‍तु को एक अर्बुद गाय लेकर भी नहीं दे रहे हैं। मैं अपना धर्म नहीं छोडूंगा, इस गाय को बलपूर्वक ले जाऊंगा। मैं क्षत्रिय हूं, ब्राह्मण नहीं हूँ। मुझे धर्मत: अपना बाहुबल प्रकट करने का अधिकार है; अत: बाहुबल से ही आपके देखते-देखते इस गाय को हर ले जाऊंगा। वसिष्ठ जी ने कहा- तुम सेना के साथ हो, राजा हो और अपने बाहुबल का भरोसा रखने वाले क्षत्रिय हो। जैसी तुम्‍हारी इच्‍छा हो वैसा शीघ्र कर डालो, विचार न करो।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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