कांगड़ा चित्रकला

कांगड़ा चित्रकला

कांगड़ा चित्रकला पहाड़ी चित्रकला का एक भाग है। भारत की चित्रकला के इतिहास के मध्ययुग में विकसित पहाड़ी शैली के अंतर्गत कांगड़ा शैली का विशेष स्थान है।

  • कांगड़ा चित्रकला का विकास कचोट राजवंश के राजा संसार चन्द्र के कार्यकाल में हुआ। यह चित्रकला शैली दर्शनीय तथा रोमाण्टिक है।
  • पौराणिक कथाओं और रीतिकालीन नायक- नायिकाओं के चित्रों की प्रधानता कांगड़ा चित्रकला में है। गौण रूप में व्यक्ति चित्रों को भी स्थान दिया गया है।
  • इस चित्रकला शैली में सर्वाधिक प्रभावशाली आकृतियाँ स्त्रियों की हैं, जिसमें चित्रकारों ने भारतीय परम्परा के अनुसार नारी के आदर्श रूप को ही ग्रहण किया है।
  • कांगड़ा शैली के स्त्री चित्रों में सत्कुल को अभिव्यक्त करने वाले वस्त्र, चाँद-सी गोल मुखाकृति, बड़ी-बड़ी भावप्रवण आँखें, भरे हुए वक्ष, लयमान उंगलियाँ, मुख में छिपा हुआ रहस्यमय भाव सर्वत्र दृष्टिगोचर होते हैं। यह नितांत निजी शैली है, जिसकी विशेषता नारी- सौन्दर्य के प्रति अत्यधिक झुकाव है।
  • कांगड़ा चित्रकला शैली में प्राकृतिक, विशेषकर पर्वतीय दृश्यों का भी चित्रण किया गया है।



वीथिका

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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