नारद सौं नृप करत बिचार -सूरदास

सूरसागर

दशम स्कन्ध

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राग बिलावल
कमल-पुष्‍प मँगाना; काली-दमन लीला



नारद सौं नृप करत विचार। ब्रज मैं ये दोउ कोउ अव‍तारि।
नंद-सुवन बलराम कन्‍हाई। इनकी गति मैं कछू न पाई।
तृनावर्त से दूत पठाए। ता पाछैं कागासुर धाए।
बकी पठाइ दई पहिलै हीं। ऐसनि कौ बल वै सब लेहीं।
उनतैं कछू भयौ नहिं काजा। यह सुनि-सुनि मोहिं आवति लाजा।
अब मुनि तुम इक बुद्धि बिचारहु। सूर स्‍याम बलरामहिं मारहु।।521।।

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टीका टिप्पणी और संदर्भ

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