नमो नमो हे कृपानिधान -सूरदास

सूरसागर

द्वितीय स्कन्ध

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राग गूजरो
श्री शुकदेव के प्रति परीक्षित-वचन



नमो नमो है कृपानिधान।
चितवत कृपा-कटाक्ष तुम्हारैं, भिटि गयौ तम-अज्ञान।
मोह-निसा कौ लेस रह्यौ नहिं, भयौ विवेक-विहान।
आतम-रूप सकल घट दरस्यौ, उदय कियौ रवि-ज्ञान।
मैं-मेरो अब रहो न मेरैं, छुट्यौ देह अभिमान।
भावै परौ आजुही यह तन, भावै रहौ अमान।
मेरै जिय अब यहै लालसा, लीला श्री भगवान।
स्त्रवन करौं निसि-बासर हित सौं, सूर तुम्हारी आन।।33।।

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टीका टिप्पणी और संदर्भ

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