राधा कृष्ण की मधुर-लीलाएँ पृ. 185

श्रीराधा कृष्ण की मधुर-लीलाएँ

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श्रीरासपञ्चाध्यायी लीला

दूसरी सखी- अरी बीर, इनके निकट चलि कैं देखौ।
दूसरी सखी- ये सोनेका सलाका हैं।
दूसरी सखी- नहीं, रूप की पताका हैं।
दूसरी सखी- प्रेमीन की भक्ति हें।
दूसरी सखी- कि मूर्तिमान मुक्ति हैं।
दूसरी सखी- कमल की कली हैं।
दूसरी सखी- कि सौभाग्य जन्मस्थली हैं।
दूसरी सखी- कमल की माला हैं।
दूसरी सखी- कि रूप-चित्रशाला हैं।
दूसरी सखी- चम्पा की पराग हैं।
दूसरी सखी- कि संतन को भाग्य हैं।
दूसरी सखी- प्रेम तरु साखा हैं।
दूसरी सखी- कि गीर्वाण-भाषा हैं।
दूसरी सखी- चंद्र चंद्रिकाली हैं।
दूसरी सखी- कि किरण सुमाली हैं।
दूसरी सखी- मानस मराली हैं।
दूसरी सखी- कि ब्रषभानु की ये लाली हैं।

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टीका टिप्पणी और संदर्भ

संबंधित लेख

क्रमांक विषय का नाम पृष्ठ संख्या
1. श्रीप्रेम-प्रकाश-लीला 1
2. श्रीसाँझी-लीला 27
3. श्रीकृष्ण-प्रवचन-गोपी-प्रेम 48
4. श्रीगोपदेवी-लीला 51
5. श्रीरास-लीला 90
6. श्रीठाकुरजी की शयन झाँकी 103
7. श्रीरासपञ्चाध्यायी-लीला 114
8. श्रीप्रेम-सम्पुट-लीला 222
9. श्रीव्रज-प्रेम-प्रशंसा-लीला 254
10. श्रीसिद्धेश्वरी-लीला 259
11. श्रीप्रेम-परीक्षा-लीला 277
12. श्रीप्रेमाश्रु-प्रशंसा-लीला 284
13. श्रीचंद्रावली-लीला 289
14. श्रीरज-रसाल-लीला 304
15. प्रेमाधीनता-रहस्य (श्रीकृष्ण प्रवचन) 318
16. श्रीकेवट लीला (नौका-विहार) 323
17. श्रीपावस-विहार-लीला 346
18. अंतिम पृष्ठ 369

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