कान्ह प्यारे बारी स्याम सुंदर मूरति पर -सूरदास

सूरसागर

दशम स्कन्ध

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राग ईमन


(कान्ह प्यारे) बारी स्याम सुंदर मूरति पर।
छबि सौ लट लटकी मुख ऊपर, राजत मुरली सुभग भरे कर।।
सुंदर नैन बिसाल भौह घन, तिलक बिराजत ललित भाल पर।
'सूरज' स्याम बन्यौ अति बानक, बनमाला उर, कटि पीतांबर।।2004।।

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