सहदेवा

सहदेवा वसुदेव की कई पत्नियों में से एक थी। इनके 'पुरु', 'विश्रुत' आदि आठ पुत्र थे। इनके आठों पुत्र इतने धर्मात्मा थे कि लोग उन्हें साक्षात धर्म का अवतार एवं अष्टवसुओं का अंश कहते थे।

  • वसुदेव जी के कुल अट्ठारह विवाह हुए, जबकि कहीं-कहीं इनकी 12 पत्नियाँ कही जाती हैं। वसुदेव की पत्नियों के ज्ञात नाम इस प्रकार हैं[1]-
  1. देवकी
  2. रोहिणी
  3. पौरवी
  4. मदिरा
  5. कौशल्या
  6. रोचा
  7. इला
  8. धृतदेवा
  9. शांतिदेवा
  10. श्रीदेवा
  11. देवरक्षिता
  12. सहदेवा


  • वसुदेव ने अपनी इन सभी पत्नियों से संतानें प्राप्त की थीं। सभी संतानों का जन्म मथुरा में ही हुआ था। इनमें से अनेकों की आयु में कुछ दिनों का ही अंतर था।
  • वसुदेव का भवन उनकी पत्नियों की संतानों से भर गया था। उनके भाइयों की पत्नियों के भी कई पुत्र हुए।
  • दीर्घ काल तक पौत्रों का मुख देखने को तरसती रही थीं देवी मारिषा और फिर उनको पितामही का गौरव देने वाले बहुत अधिक एक साथ आ गए उनके पुत्रों के गृहों में। उनकी अभिलाषा भली प्रकार पूर्ण हो गई।


टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. भगवान वासुदेव -सुदर्शन सिंह चक्र पृ. 244

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