त्रिवेणु

त्रिवेणु का उल्लेख हिन्दू पौराणिक महाकाव्य महाभारत में हुआ है। यह महाभारत में प्रयुक्त होने वाले रथ के अग्रभाग का एक अंग था।

  • महाभारत कर्ण पर्व में अर्जुन और संशप्तकों के घोर युद्ध का वर्णन हुआ है, त्रैलोक्य-विजय के लिए वज्रधारी इन्द्र के साथ घटित हुए दैत्यों के संग्राम के समान यह रोंगटे खड़े कर देने वाला था। अर्जुन ने सब ओर से शत्रुओं के अस्त्रों का अपने अस्त्रों द्वारा निवारण कर उन्हें तुरंत ही अनेक बाणों से घायल करके उन सब के प्राण हर लिये थे। अर्जुन ने संशप्तकों के रथ के त्रिवेणु, चक्र और धुरों को छिन्न-भिन्न कर दिया। योद्धाओं, अश्वों तथा सारथियों को मार डाला। आयुधों और तरकसों को विध्वंस कर डाला। ध्वजाओं के टुकड़े-टुकड़े कर दिये थे।


टीका टिप्पणी और संदर्भ

महाभारत शब्दकोश |लेखक: एस.पी. परमहंस |प्रकाशक: दिल्ली पुस्तक सदन, दिल्ली |संकलन: भारत डिस्कवरी पुस्तकालय |पृष्ठ संख्या: 101 |


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