तुमुल युद्ध

तुमुल युद्ध प्राचीन समय में लड़ा जाता था। महाभारत युद्ध में भी कई महारथियों के मध्य यह युद्ध लड़ा गया।

  • कुरुक्षेत्र में चल रहे युद्ध की जानकारी धृतराष्ट्र को देते हुए एक स्थान पर संजय कहते हैं कि- "राजन! भीमसेन शीघ्रतापूर्वक रथ से उतरकर बड़े वेग से दुःशासन की ओर दौडे़। उस समय वेगशाली भीमसेन को आपके पुत्रों द्वारा किये गये शत्रुतापूर्ण बर्ताव याद आने लगे थे। राजन! वहाँ चारों ओर जब प्रधान-प्रधान वीरों का वह अत्यन्त घोर 'तुमुल युद्ध' चल रहा था, उस समय अचिन्त्यपराक्रमी महाबाहु भीमसेन दुःशासन को देखकर पिछली बातें याद करने लगे कि देवी द्रौपदी रजस्वला थी। उसने कोई अपराध नहीं किया था।"[1]
  • महाभारत में ही एक अन्य स्थान पर संजय कहते हैं- "महाराज! मैं अत्‍यन्‍त खेद के साथ आपको उस अत्‍यन्‍त भंयकर नरसंहार का वृतान्‍त बता रहा हूँ, जिसके लिये एक वीर का बहुत-से महारथियों के साथ 'तुमुल युद्ध' हुआ था। अभिमन्‍यु युद्ध के लिये उत्‍साह से भरा था। वह रथ पर बैठकर आपके उत्‍साह भरे शत्रुदमन समस्‍त रथारोहियों पर बाणों की वर्षा करने लगा। द्रोणाचार्य, कर्ण, कृपाचार्य, अश्वत्थामा, कृतवर्मा, बृहद्वल, दुर्योधन, भूरिश्रवा, शकुनि, अनेकानेक नरेश, राजकुमार तथा उन‍की विविध प्रकार की सेनाओं पर अभिमन्‍यु अलातचक्र की भाँति चारों ओर घूमकर बाणों का प्रहार कर रहा था।"[2]


टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. महाभारत कर्ण पर्व अध्याय 83 श्लोक 1-15
  2. महाभारत द्रोण पर्व अध्याय 39 श्लोक 1-19

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