कृष्णांक पृ. 941

कृष्णांक

भीख

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(लेखक– एक भिखारी)

‘नारायण ! नारायण !!’
‘कौन है ?'
‘एक भिखारी’
‘ठहरो, लाती हूँ’
इतना कहकर नन्‍दरानी ने बहुमूल्‍य हीरे-मोतियों का थाल भरा, और स्‍वयं लेकर बाहर आयी। परन्‍तु वह देखते ही सहम गयी। देखा, गले में सांप, जटाजूट में सांप, सांप का कंकण, हाथ में डमरू और सुन्‍दर गौर शरीर पर बभूत रमाये एक मस्‍त जोगी खड़ा है। समाधि के नशे में उसकी आंखें चढ़ी जा रही हैं। नन्‍दरानी ने समझा कि कोई सिद्ध योगेश्‍वर है। वह बोली– ‘नाथ जी ! यह लो भीख, मेरे लाल को असीस दो, जिससे उसके सारे अमंगल टल जायँ’। ‘मैया ! तेरी यह भीख मुझे नहीं चाहिये। मुझे तो एक बार अपने लाल का मुखड़ा दिखला दे। उसे देखते ही मेरे सब अमंगल टल जायँगे’। ‘नाथजी ! मेरा सांवरा अभी निरा बच्‍चा है, तुम्‍हारे भेष को देखकर डर जायगा। भीख थोड़ी हो तो और ला दूँ, देखो, मेरे लाल का किसी तरह अमंगल न हो, उसके सारे कुग्रह टल जायँ’। ‘अरी मैया ! तेरा लाल काल का भी काल है, उसी के डर से सूर्य, चन्‍द्र, यमराज सब अपना-अपना कार्य कर रहे हैं, वह किससे डरेगा ? साक्षात मृत्‍यु देवता भी उसके नाम से डर जाते हैं। मुझे और कोई भीख नहीं चाहिये माता ! मुझे तो एक बार अपने उस सलोने सांवरे की हंसीली, छबीली, निराली, मतवाली काली छवि का दर्शन करा दे। बस, एक बार उसकी झांकी कर लेने दे’।
‘ना, ना, नाथजी ! मैं अपने लाल को बाहर न लाऊँगी। आजकल व्रज में असुरों का बड़ा उत्‍पात है, अभी उस दिन पूतना आयी थी। भगवान ने रक्षा करी। मैं अभी-अभी उसकी मांग संवारकर और उसके आंखों में काजल डालकर आयी हूँ, कहीं नजर लग जाय तो फिर तुम्‍हें कहाँ ढूँढती फिरूँ ?’ शिवजी हँसकर मन ही मन यशोदा के भाग्‍य की सराहना करने लगे। बोले– ‘मेरी मैया ! तू धन्‍य है, जो सर्वाधार त्रिलोकनाथ को अपने गोद में खिलाती है, अपने हाथों श्रृंगार के सागर का श्रृंगार करती है, तेरे समान बड़भागी दूसरा कौन होगा ? अरी, जिसके भ्रकुटि विलास से सारे विश्‍व का सृजन और संहार होता है, उसके नजर कैसी ?’ ‘तुम क्‍या कहते हो, बाबा ! मैं यह सब नहीं समझती, तुम्‍हारे वेदान्‍त का हम गँवारी ग्‍वालिनों को क्‍या पता ? भीख लेनी हो तो ले लो, मेरे श्‍यामसुन्‍दर को भूख लगी होगी, मैं और यहाँ नहीं ठकर सकती’।

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टीका टिप्पणी और संदर्भ

संबंधित लेख

कृष्णांक
क्रम संख्या विषय पृष्ठ संख्या
1 प्यारे कन्हैया ! ('तेरा ही') 1
2 कृष्णस्तु भगवान्स्वयम् (श्रीगोवर्धन पीठाधीश्वर श्री जगदगुरु स्वामीजी श्री 1108 श्रीभारती कृष्णतीर्थ जी महाराज) 2
3 भगवान श्रीकृष्ण (श्रीकान्ची-प्रतिवादिभयंकर मठाधीश्वर जगद्गुरु श्रीभगवद्रामानुज-सम्प्रदायाचार्य श्री 1108 श्रीअनन्ताचार्य स्वामीजी महाराज) 20
4 कृष्णस्तु भगवान्स्वयम् (श्रीमन्माध्व सम्प्रदायाचार्य दार्शनिक सार्वभौम साहित्य दर्शनाद्याचार्य, तर्करत्न-न्यायरत्न, गोस्वामी श्रीदामोदर शास्त्री) 34
5 श्रीकृष्ण धारणा (परमहंस परिव्राजकाचार्यवर्य श्री 108 गोस्वामी श्रीमद्भक्ति सिद्धान्त जी सरस्वती महाराज) 41
6 जन्म कर्म च मे दिव्यम्‌ (श्रीजयदयालजी गोयन्दका) 46
7 कृष्णावतार पर वैज्ञानिक दृष्टि (महामहोपाध्याय पण्डितवर श्रीगिरिधरजी शर्मा चतुर्वेदी) 59
8 श्रीकृष्ण की होली (श्री आनन्द शंकर बापूभाई ध्रुव, एम.ए. प्रो-वाइस-चान्सलर हिन्दू- विश्वविद्यालय, काशी) 98
9 महाभारत और श्रीमद्भागवत (पं. श्रीमदनमोहन जी मालवीय) 107
10 श्रीकृष्ण की ऐतिहासिकता पर गान्धीजी (प्रेषक-श्रीकाशीनाथ नारायण त्रिवेदी) 108
11 श्रीकृष्ण और महात्‍माजी का अनासक्ति योग (साहित्याचार्य पं. श्रीपद्मसिंह जी शर्मा) 110
12 भगवान श्रीकृष्ण का अवतार-प्रयोजन तथा परत्व (पण्डितवर श्रीअमोलकरामजी तर्कतीर्थ, तर्करत्न, तर्कवागीश) 115
13 भगवान श्रीकृष्ण की कुछ लीलाएँ और उनसे शिक्षा (डा. एनी वेसेण्ट) 126
14 शुभाशंसा (आचार्य पूज्यवर पं. श्रीमहावीरप्रसादजी द्विवेदी) 129
15 जन्माष्टमी का सन्देश (साधु श्री टी.एल. वास्वानी जी) 134
16 जन्माष्टमी (श्रीदत्तात्रय बालकृष्ण कालेलकर) 135
17 भगवद्विग्रह (पं० श्रीगोपीनाथ जी कविराज, एम्० ए०, प्रिंसिपल, गवर्नमेण्ट-संस्कृत-कालेज, काशी) 142
18 कृष्‍णस्‍तु भगवान्‍स्‍वयम (गोस्‍वामी श्रीकृष्‍णजीवन जी ʻविशारदʼ बड़ा मन्दिर, बम्‍बई) 160
19 श्रीकृष्‍ण-भक्‍त के लक्षण (पूज्‍यपाद महात्‍मा श्री उडिया स्‍वामीजी महाराज) 162
20 भगवान श्रीकृष्‍ण (साहित्‍याचार्य पं. श्रीशालग्रामजी शास्‍त्री) 164
21 साक्षात परब्रह्म का आविर्भाव (देवर्षि पं० श्रीरमानाथजी शास्‍त्री) 189
22 श्रीकृष्‍ण की नित्‍य-लीला (भागवतरत्‍न श्रीकुलदाप्रसादजी मल्लिक) 215
23 श्‍याम की वंशी (महामहोपाध्‍याय पं० श्रीप्रमथनाथजी तर्कभूषण) 220
24 श्रीकृष्‍ण-चरित्र (स्‍वामीजी श्रीभोलेबाबा जी) 227
25 श्रीकृष्‍ण (पं. श्रीभवानीशंकरजी महाराज) 247
26 हिन्‍दू–संगठन का मूल-मन्‍त्र (लाला श्री श्रीअयोध्‍या प्रसादजी अग्रवाल, एडवोकेट) 255
27 श्रीकृष्‍ण-भक्‍त के आचरण 267
28 मेरा अलौकिक गान (मैं) 268
29 चीर-हरण का रहस्‍य (श्रीभूपेन्‍द्रनाथ सान्‍याल) 272
30 भागवत के बालकृष्ण (पं. श्रीनन्दकिशोर जी शुक्ल, वाणीभूषण) 290
31 वेणु-गीत (प्रोफेसर श्री जेठालाल गोवर्धनदास शाह, एम्. ए.) 298
32 कृष्णस्तु भगवान स्वयम (श्रीकृष्णप्रेमजी वैरागी) 307
33 श्रीकृष्ण-गुण-श्रवण-कीर्तन-माहात्म्य 323
34 आँसू की दो बूँदें (पं० श्रीशोभालालजी शास्त्री) 325
35 पवित्र व्रज-लीला (एक विचारशील सज्जन) 327
36 श्रीकृष्ण का अवतारत्व (श्रीहीरेन्द्रनाथ जी दत्त) 340
37 श्रीकृष्ण-चरित्र (चौधरी श्रीरघुनंदनप्रसादसिंह जी) 347
38 श्रीकृष्ण की नित्य प्रातः क्रिया (एक प्राचीनता का उपासक) 353
39 परात्पर श्रीकृष्णावतार का प्रयोजनविमर्श (पं० श्री धराचार्य जी शास्त्री वेदांततीर्थ) 355
40 गीता के उपदेष्टा श्रीकृष्ण (स्वामी श्रीविद्यानंदजी महाराज) 361
41 आदर्श पुरुष श्रीकृष्ण (चतुर्वेदी पं० श्रीद्वारकाप्रसादजी शर्मा) 365
42 श्रीकृष्ण-स्मरण की महत्ता 373
43 श्रीकृष्ण जी की आठपटरानियाँ (बहिन ज्ञानवती देवी जी) 375
44 सर्वगुणाधार श्रीकृष्ण (पं. श्री जगन्‍नाथ प्रसादजी चतुर्वेदी) 379
45 श्रीकृष्णावतार (महामहोपाध्‍याय डॉ0 श्री गंगानाथजी झा, एम ए डि लिट, वाइस चांसलर, प्रयाग विश्‍वविद्यालय) 382
46 अनिर्वचनीय भगवान श्रीकृष्‍ण (पं. श्री व्रजनाथजी शास्‍त्री, विशारद) 384
47 श्रीकृष्ण-चैतन्य महाप्रभु और श्रीकृष्ण भक्ति (श्रीकृष्णकिंकर- बालकृष्ण) 389
48 श्रीरामजी और श्रीकृष्णजी (श्रीमहन्ती यादवशंकरजी जामदार, रिटायर्ड सबजज) 401
49 यमदूत नरक में किसे ले जाते हैं 404
50 योगेश्वर श्रीकृष्ण (स्वामी श्री दयानन्द जी) 405
51 रासलीला (पं. श्रीरामदयाल मजूमदार, एम्‌. ए‌) 414
52 श्रीकृष्ण के विराट-स्वरूप 433
53 श्रीकृष्ण चरित्र का सार (श्रीग.वि.केतकर, बी. ए., एल-एल. बी.) 438
54 श्रीरासलीला का रहस्य (आचार्यश्रीमदनमोहनजी गोस्वामी वैष्णवदर्शनतीर्थ, भागवतरत्न) 441
55 रास-लीला का स्थान (प्रोफेसर श्रीजयेन्द्रनाथ भगवानलाल दूरकाल, एम. ए.) 446
56 रास-लीला में आध्यात्मिक तत्त्व (पं.श्रीबलदेवप्रसादजी मिश्र, एम. ए., एल.-एल. बी., एम. आर. ए. एस.) 448
57 प्रेम और सेवा के अवतार श्रीकृष्ण (श्रीयुत पी. एन. शंकरनारायण ऐयर, बी. ए., बी. एल.) 451
58 श्रीकृष्ण और द्रौपदी 467
59 श्रीकृष्ण-गीतावली (साहित्यरत्न पं. श्रीअयोध्यासिंहजी उपाध्याय 'हरिऔध') 473
60 श्रीकृष्ण-चरण-सेवन का माहात्मय 482
61 श्रीकृष्ण-लीला और सिक्ख गुरु (श्रीगुरांदित्ताजी खन्ना) 485
62 श्रीकृष्ण तत्त्व (पण्डितवर श्रीपंचाननजी तर्करत्न) 488
63 पाण्डव बन्धु श्रीकृष्ण (श्रीयुक्त बी. सेठुराव एम. ए.) 495
64 अवतार का हेतु (भक्तवर श्रीयादवजी महाराज) 503
65 हाँ, बस, यों ही (श्रीबालकृष्ण बलदुवा) 508
66 श्रीकृष्ण और भावी जगत (श्रीप्रेमचन्द्रजी) 510
67 लोकसंग्रह और भगवान श्रीकृष्ण (पं श्रीसदाशिवजी शास्त्री भिडे, सम्पादक 'वैदिक- कर्मयोग' गीता-धर्म-मण्डल, पूना) 514
68 श्रीकृष्ण स्वयं भगवान थे (सेठ श्रीकन्हैयालालजी पोद्दार) 522
69 लोकनायक श्रीकृष्ण (श्रीयुक्त दत्तात्रय बालकृष्ण कालेलकर) (अनुवादक- काशीनाथ नारायण त्रिवेदी) 530
70 भगवान की एक लीला (पं. श्रीजीवनशंकरजी याज्ञिक एम. ए.) 532
71 राजनीतिज्ञ भगवान श्रीकृष्ण (काव्यतीर्थ प्रोफेसर श्रीलौटुसिंह जी गौतम, एम. ए., एल. टी., एम. आर. ए. एस.) 537
72 एकमात्र श्रीकृष्ण ही धन्य एवं श्रेष्ठ हैं (भिक्षु श्रीगौरीशंकरजी) 545
73 जन्माष्टमी अर्थात घोर अन्धकार में दिव्य प्रकाश ! (पं. श्रीलक्ष्मणनारायणजी गर्दे) 546
74 श्रीकृष्ण-चरित्र की समीक्षा (श्रीफीरोज कावसजी दावर, एम. ए., एल.-एल. बी.) 550
75 श्रीमद्भागवत में श्रीराधाजी (पण्डित श्रीबालचन्द्रजी शास्त्री) 568
76 भगवान श्रीकृष्ण एक थे या अनेक ? (श्रीयुत एस. एन. ताडपत्रीकर एम. ए., भाण्डारकर इंस्टिच्यूट, पूना) 569
77 छान्दोग्योपनिषद् और श्रीकृष्ण (महात्मा नारायण स्वामीजी) 574
78 भगवान श्रीकृष्ण और हिन्दू-धर्म (डा. श्रीमंगलदेवजी शास्त्री एम. ए., पी.-एच. डी.) 576
79 गुजरात के महान कृष्ण-भक्त नरसी मेहता (श्री आई. जे. एस. तारापुरवाला बी. ए., पी.-एच. डी., बार-एट-ला) 582
80 योगेश्वरेश्वर श्रीकृष्ण (राजा श्रीलक्ष्मीनारायण हरिचन्दन जगदेव बहादुर, पुरातत्त्वविशारद,विद्यावाचस्पति) 589
81 भगवान श्रीकृष्ण और भारतीय स्त्रियाँ (श्री के. एस. रामस्वामी शास्त्री, बी. ए. बी. एल., सबजज) 594
82 श्रीकृष्ण की गीता और दर्शनशास्त्रों का समन्वय (पं. श्रीनरदेवजी शास्त्री, वेदतीर्थ) 620
83 भगवान श्रीकृष्ण और उनका दिव्य उपदेश (स्वामीजी श्रीशिवानन्दजी महाराज) 606
84 श्रीराम-कृष्ण का ऐक्य (श्रीजनकसुताशरण शीतलासहायजी सावान्त बी. ए., एल-एल. बी., सम्पादक 'मानसपीयूष') 611
85 कवियों के श्रीकृष्ण (कुंवर श्री व्रजेन्द्र सिंहजी ‘साहित्यालंकार’) 623
86 महाराष्ट्र में श्रीकृष्ण-भक्ति (श्रीलक्ष्मण रामचंद्र पांगारकर, बी. ए. सम्पादक ‘मुमुक्षु’) 629
87 भगवान श्रीकृष्ण की मधुर-मुरली (श्रीयुत एस. राजाराम, सम्पादक ‘भारतधर्म’ अडयार) 646
88 अद्भुतकर्मी श्रीकृष्ण ('कृष्ण-किंकर') 652
89 आदिगुरु श्रीकृष्ण (साहित्यरंजन पं. श्रीविजयानंद जी त्रिपाठी) 667
90 श्रीकृष्ण की जन्म-ति‍थि (रावबहादुर श्रीचिन्तामणि विनायक वैद्य, एम. ए., एल-एल. बी) 670
91 श्रीकृष्ण का अद्भुत अवतार (श्री रामचंद्र कृष्ण कामत) 673
92 श्रीकृष्ण का विश्वरुप (श्रीयुक्त शिवदास बुद्धिराज एम. ए., रि. सेसन जज काश्मीर) 704
93 श्रीकृष्ण और क्राइस्ट (डॉ. एच. डब्ल्यू. बी. मोरेनो एम. ए. पी. एच. डी.) 711
94 श्रीकृष्ण और उनके उपदेश (स्वामी श्रीअभेदानन्दजी) 713
95 भगवान श्रीकृष्ण और भावी संसार (श्रीयुक्त बी. के. वेंकटाचारी बी.ए. एल.एल.बी. एडवोकेट) 722
96 श्रीकृष्ण-रहस्य (म. श्रीबालकरामजी विनायक, अयोध्या) 724
97 श्रीकृष्ण और गोपिकाएँ (श्रीयुत एस.बी. कौजलगी) 730
98 पूर्णावतार श्रीकृष्ण (बहुविद्याविशारद श्रीआनन्दघनरामजी) 733
99 श्रीकृष्‍णोपदिष्‍ट यज्ञ का रहस्‍य (बहिन सुब्‍बालक्ष्‍मी अम्‍मल बी. ए., एल.टी.) 747
100 श्रीकृष्‍ण और सुदामा (साहित्‍याचार्य पंडित श्री बलदेवजी उपाध्‍याय एम. ए.) 749
101 श्रीकृष्‍ण ही भारतवर्ष की आत्‍मा हैं (श्रीयुत विपिनचन्द्र पाल) 754
102 आदर्श सखा श्रीकृष्‍ण (पं. श्रीकृष्‍णदत्‍त जी भारद्वाज शास्‍त्री, आचार्य, बी. ए.) 757
103 दीनबन्‍धु श्रीकृष्‍ण (बाबा श्री राघवदासजी) 760
104 श्रीकृष्‍ण-परत्‍वम् (भक्‍तवर पं. श्री रामप्रसादजी महाराज) 765
105 श्रीकृष्‍ण और अर्जुन की मैत्री ('दासानुदास) 788
106 सत्‍संग और भगवान श्रीकृष्‍ण (श्रीवृंदावनदासजी, बी. ए., एल. एल. बी) 803
107 भगवान श्रीकृष्‍ण का आदेश 806
108 श्रीकृष्‍ण भक्ति रस (श्री ज्‍वालाप्रसादजी कानोड़िया) 814
109 भगवान श्रीकृष्ण के जन्‍म-कर्मों की अलौकिकता (श्रीभालचंद्र रामचंद्र पटवर्धन, एम. ए., एल. एल. बी.) 840
110 दिखावटी भक्तिमार्ग और कर्मयोग (पं. श्रीबद्रीनाथजी भट्ट, बी. ए.) 849
111 भागवत के कुछ विचारणीय विषय (एक प्रेमी महायश) 853
112 लीला- पुरुषोत्‍तम भगवान श्रीकृष्‍ण (कविराज पं. श्री गयाप्रसादजी शास्‍त्री साहित्‍याचार्य, ‘श्रीहरि’) 856
113 श्रीकृष्‍ण और शंकराचार्य (पं. श्रीबलदेवप्रसादजी मिश्र, एम.ए., एल.-एल.बी., एम.आर.ए.एस.) 862
114 श्रीमद्भागवत में श्रीकृष्ण-चरित्र (दण्डिस्वामीजी श्रीसहजानन्दजी सरस्वती) 866
115 श्रीकृष्‍णोपदिष्‍ट कर्मयोग का स्‍वरूप (पण्डितवर श्रीनाथूराम जी शर्मा) 876
116 श्रीकृष्‍णोपदिष्‍ट संन्‍यास का स्‍वरूप (श्री सुरेन्‍द्र नाथ मित्र, एम.ए., बी.एस.सी., एल.टी.) 879
117 श्रीकृष्‍णोपदिष्‍ट संन्‍यास और कर्मयोग (एक जिज्ञासु) 893
118 व्रज और व्रज-रज की महत्‍ता (पं. श्रीगौरीशंकरजी द्विवेदी ‘शंकर’) 895
119 प्रेमावतार श्रीकृष्‍ण (पं. श्रीहरिवक्ष जी जोशी, काव्‍य सांख्‍य स्‍मृतितीर्थ) 904
120 श्रीकृष्‍णलीला में माधुर्य रस (आचार्य श्री अनन्‍तलाल जी गोस्‍वामी) 916
121 व्रज परिचय (गोस्‍वामी श्रीलक्ष्‍मणाचार्य जी, मथुरा) 919
122 प्रेममय श्रीकृष्‍ण (श्रीयुत् सदानन्‍द जी सम्‍पादक ‘मेसेज’) 939
123 भीख (एक भिखारी) 941
124 जगद्गुरु श्रीकृष्‍ण (श्रीयुत् जी. वी. केतकर, बी.ए., एल.एल.बी. मंत्री गीता धर्म मण्‍डल, स. सम्‍पादक ‘केसरी’ पूना) 943
125 श्रीकृष्‍ण के सार्वभौम उपदेश का दिग्‍दर्शन (स्‍वामीजी श्रीज्‍योतिर्मयानन्‍द जी पुरी) 953
126 भगवान श्रीकृष्‍ण का जन्‍मपत्र (स्‍व. पं. लज्‍जाराम जी मेहता) 962
127 सारथ्‍य (‘सारजात्‍मजा’) 966
128 श्रीराधा-रहस्‍य (आचार्य श्री हितरूपलाल जी गोस्‍वामी ) 967
129 गीता और श्रीकृष्‍ण (पं. श्रीझाबरमल्‍ल जी शर्मा) 972
130 श्री श्रीराधातत्त्व (पं. श्रीबद्रीप्रसाद जी योगाभ्‍यासी ) 974
131 गीता के वक्‍ता श्रीकृष्‍ण (वैष्‍णवाचार्य म. श्रीरामदासजी श्रीपिण्‍डौरीधाम ) 979
132 श्रीकृष्‍णार्जुन-युद्ध (प्रेषक – पूज्‍यपाद स्‍वामी श्रीस्‍वत:प्रकाश जी ‘हरिबाबा’) 988
133 अर्वाचीन भारत के प्रति श्रीकृष्‍ण का संदेश (श्रीयुत् मोहम्‍मद हाफिज सैयद एम. ए., एल. टी., लन्‍दन) 992
134 श्रीकृष्‍णलीला के अन्‍ध अनुकरण से हानि (निरीक्षक) 1001
135 श्रीमद्भागवत भगवान व्‍यासकृत है (गोस्‍वामी श्रीलक्ष्‍मणाचार्यजी) 1003
136 श्रीकृष्‍ण और उद्धव (श्रीरामचन्द्रकशंकर जी टक्की’ महाराज बी.ए.) 1009
137 अय प्‍यारे कृष्‍ण ! (श्रीवियोगी हरिजी) 1015
138 क्षमा-प्रार्थना (हनुमानप्रसाद पोद्दार) 1019
पद्य
1 अतीत संगीत (साहित्यरत्न पं. श्रीअयोध्यासिंहजी उपाध्याय ‘हरिऔध’) 28
2 हम लेंगे तेरा नाम (रामनरेश त्रिपाठी) 40
3 गीत (श्रीसुमित्रानन्दन पन्त) 44
4 नटवर ! (श्रीसत्याचरणजी 'सत्य' एम. ए.) 96
5 उद्धव के प्रति (स्व. सेठ श्रीअर्जुनदास केडिया) 128
6 गगन के प्रति (शांतिप्रिय द्विवेदी) 131
7 श्रीकृष्णाष्टक (पं. श्रीरमाशंकरजी मिश्र 'श्रीपति) 139
8 लाली (चन्‍द्रभानुसिंह ʻरजʼ दीवानबहादुर) 185
9 भगवान श्रीकृष्‍ण के चरणों में (पं० श्रीरामसेवकजी त्रिपाठी सम्‍पादक ʻमाधुरीʼ) 186
10 द्रौपदी-रक्षा (महामहोपाध्‍याय पं० श्रीदेवीप्रसाद जी शुक्‍ल, कविचक्रवर्ती) 214
11 तेरी शान (मदनगोपाल ʻव्रजेशʼ) 226
12 श्रीकृष्‍ण आओ ! (रामवचन द्विवेदी ʻअरविन्‍दʼ) 245
13 श्रीकृष्‍ण और सुदामा (श्रीजगदीश झा ʻविमलʼ) 252
14 चीरहरणलीलारहस्य (नारायणप्रसाद ’बेताब’) 288
15 श्रीकृष्णा- वन्दना (पं० श्री हगवतीप्रसाद जी त्रिपाठी, विशारद, एम्० ए०, एल-एल्० बी०) 306
16 कृष्ण (प्० श्री गंगा विष्णु जी पाण्डेय विद्याभूषण विष्णु) 338
17 कामना (श्यामनारायण पाण्डेय) 383
18 हरे कृष्ण! (प्रेमनारायण त्रिपाठी 'प्रेम') 388
19 हरि-दर्शन का सुख (चंद्रकला) 400
20 भावना (बलदेवप्रसादमिश्र, एम्‌. ए., एल-एल.बी., एम्‌.आर.ए.एस.) 413
21 हृदयेच्छा (श्रीदेवीप्रसादजी गुप्त, 'कुसुमाकर', बी.ए.,एल-एल.बी.) 431
22 कन्हैया आजा! (सैय्यद कासिमअली विशारद, साहित्यालंकार) 437
23 अभिलाषा (कविवर श्रीश्यामाचरणदत्तजी पंत) 445
24 कृष्ण कला (भगवती मंजुकेशी देवी) 450
25 देवकी का स्वप्न (प. श्रीराधेश्यामजी कथावाचक) 465
26 भगवान श्रीकृष्ण (राजा सर दलजीतसिंहजी सी. आई. ई.) 484
27 आइये (श्रीअवंतविहारी माथुर 'अवन्त' कविरत्न) 507
28 श्रीकृष्णजी के नौ रस (शारद 'रसेंद्र) 508
29 एक झाँकी (लक्ष्मणाचार्य वाणीभूषण) 536
30 सदा आनन्दमय 568
31 रंग में उनके सराबोर हूँ मैं (श्रीगोकुलदास जी) 588
32 प्रेम-पद (श्रीवल्ल्भसखा जी) 600
33 सर्वव्यापी श्री कृष्ण (श्रीनंदकिशोर जी झा, काव्यतीर्थ) 604
34 आओ (महादेवप्रसाद वाजपेयी 'ईश') 605
35 सर्वहितकारी है (स्वर्गीय पं० पन्नालालजी) 622
36 घनश्याम ! (चतुर्वेदी रामचन्द्र शर्मा) 701
37 श्रीकृष्णाऽर्पणमस्तु ! (कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’) 732
38 होली (श्रीदिलीप कुमार राय) 838
39 माधव-महिमा (कुमार श्रीप्रतापनारायणजी ‘कविरत्‍न’) 851
40 बांसुरी (भुवेनश्‍वर सिंह ‘भुवन’ साहित्‍यालंकार) 865
41 कृष्‍णकला (श्रीसुखराम जी चौबे ‘गुणाकर’) 874
42 इन्‍द्र पर चढ़ाई (श्रीयुक्‍त द्वारकाप्रसाद जी ‘रसिकेन्‍द्र’) 903
43 कन्‍हैया ! (काव्‍यविनोद पं. श्रीलोचनप्रसाद जी पाण्‍डेय) 959
44 श्रीकृष्‍ण-स्‍तुति (आरती) (श्रीनारायणदास जी पोद्दार) 973
45 हरे ! (पं. श्रीतुलसीराम जी शर्मा ‘दिनेश’) 987
46 परा-दृष्टि (श्रीपद-रज-'शिशु') 1013
47 लाल की मुसकान (श्रीमुनिलाल) 1023
48 कहां छिपा (पं. श्रीजगन्‍नाथ जी मिश्र गौड ‘कमल’) 1024
संगृहीत कविताएँ
1 निसिदिन गाइये (नागरीदासजी) 464
2 छार ऐसे जीबै पै (ललितकिशोरीजी) 483
3 लालकी मुसुकान (भगवतरसिकजी) 567
4 आयु सिरानी (ललितकिशोरीजी) 645
5 बंसीवारो श्यााम (रसखानि) 650
6 श्रीकृष्णप्रेम चालीसा ! (नारायणस्वामीजी) 702
7 भक्त (सूरदासजी) 732
8 बांसुरी (रसखानिजी) 746
9 आँखिन को फल पायो (मतिरामजी) 764
10 भक्‍त के कार्य (श्रीस्वामी हरिदासजी) 839
11 श्रीमधुराष्‍टकम् (श्रीश्रीवल्‍लभाचार्यविरचितम्) 965
परिशिष्टांक
1 ध्यान [सं. कविता] (श्रीनारायण स्वामीजी) 1024
2 भगवान श्रीकृष्‍ण के चरित्र का रहस्‍य (महात्‍मा गांधी जी) 1025
3 भक्‍त अर्जुन और श्रीकृष्‍ण (पूज्‍यपाद स्‍वामी श्रीस्‍वत: प्रकाश जी ‘हरिबाबा’द्वारा प्रेषित) 1026
4 कृष्ण-मुरलिका (पं. श्रीश्यामाकांत जी पाठक) 1028
5 भगवान श्रीकृष्‍ण का प्रभाव (श्रीजयदयाल जी गोयन्‍दका) 1029
6 कर्मयोगी, युग-प्रवर्तक एवं धर्मसंस्‍थापक श्रीकृष्‍ण [संगृहित] (बाबू श्रीभगवानदास जी एम. ए.) [अनुवादक- गोस्वामी चिम्मनलालजी] 1040
7 चीर-हरण का रहस्‍य (प्रभासपत्‍तनस्‍थ श्रीशारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु श्रीशंकराचार्य स्‍वामी जी श्रीस्‍वरूपानन्‍दतीर्थ जी महाराज) 1046
8 हे कृष्‍ण ! तुम्‍हारी गति तुम्‍हीं को ज्ञात है ! (काव्‍यविनोद पं. श्रीलोचनप्रसाद जी पाण्‍डेय) 1052
9 संगीत-शास्‍त्रज्ञ श्रीकृष्‍ण (चतुर्वेदी पं. श्रीद्वारकाप्रसाद जी शर्मा) 1056
10 श्रीकृष्‍ण की आंख-मिचौनी (श्रीवेणुगोपालजी आचार्य) 1058
11 अवतार तत्‍व (साहित्‍याचार्य पं. श्रीशालग्राम जी शास्‍त्री) 1064
12 श्रीराधाजी के प्रति भगवान श्रीकृष्‍ण का तत्‍त्‍वोपदेश 1070
13 चक्रपाणि (पं. श्रीब्रह्मदत्‍त जी शर्मा ‘शिशु’) 1072
14 जय श्रीकृष्‍ण ! [कविता] (पं. श्रीझाबरमल्‍ल जी शर्मा) 1076
15 श्रीकृष्‍ण-मुख-वर्णन [कविता] (अर्जुनदास केडिया) 1078
16 श्‍याम-स्‍मरण [कविता] (राजारामजी शुक्ल) 1079
17 श्री श्रीराधातत्त्‍व (श्रीअमूल्‍यचरण विद्याभूषण, प्रोफेसर विद्यासागर कॉलेज) 1081
18 भगवान श्रीकृष्‍ण के चौंसठ गुण (गोस्‍वामी श्रीचिम्‍मनलाल जी एम. ए.) 1089
19 श्रीकृष्‍ण और भागवत – धर्म (श्री जगन्‍नाथ प्रसाद जी मिश्र, बी.ए., बी.एल.) 1091
20 जन्‍माष्‍टमी का उत्‍सव (श्रीदत्‍तात्रेय बालकृष्‍ण कालेलकर, गुजरात विद्यापीठ) [अनुवादक- काशीनाथ नारायण त्रिवेदी] 1099
21 मुसलमान कवि और भगवान श्रीकृष्‍ण (श्रीव्रजमोहन जी वर्मा) 1105
22 कृष्‍ण – कृष्‍ण कहते मैं तो कृष्‍ण हो गया ! (पं. श्रीरमेशचन्‍द्र जी त्रिपाठी) 1122
23 श्रीकृष्‍ण [कविता] (महामहोपाध्‍याय पं. श्रीदेवीप्रसाद जी शुक्‍ल कवि- चक्रवर्ती ) 1130
24 श्रीकृष्‍णाष्‍टक (बाबू जगन्‍नाथप्रसाद ‘भानु’ ) 1131
25 मोक्ष-संन्‍यासिनी गोपियां (गोपी-पद-रेण) 1134
26 श्रीराधिका जी का उद्धव को उपदेश 1146

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